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रेलवे भूमि अधिग्रहित किसानों के आंदोलन का समर्थन करने पहुंचे कई संगठन के नेता


रीवा सीधी सिंगरौली रेल लाइन परियोजना भूमि अधिग्रहण से पीड़ित किसानों के गोविंदगढ़ में जारी आंदोलन के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक शिव सिंह किसान नेता रामजीत सिंह इंद्रजीत सिंह शंखू और पूर्व विधायक राम गरीब बनवासी, पूर्व विधायक राजेंद्र मिश्रा ने पहुंचकर समर्थन किया ,आंदोलन स्थल पर आंदोलनकारी सुग्रीव सिंह महेंद्र पांडे राजेंद्र शर्मा रामायण शर्मा संजीव विश्वकर्मा ददन सिंह श्रीकांत अग्निहोत्री विनय द्विवेदी मोहित मिश्रा शैलेंद्र पांडे आदि उपस्थित रहे, संयुक्त मोर्चा के संयोजक शिव सिंह ने बताया कि सन 2008 एवं 2009 में रीवा से सिंगरौली के अंदर लगभग हजारों किसानों की जमीने अधिग्रहित की गई थी कई वर्षों तक यह लड़ाई हमने लड़ी दिनांक 17 दिसंबर 2013 को भूमि अधिग्रहण से प्रभावित विस्थापित किसानों के आश्रितों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिए जाने की अधिसूचना जारी की गई थी जिसकी अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2014 रखी गई थी जिसमें सैकड़ों किसानों के परिजनों को नौकरी दी गई अभी भी सैकड़ों की संख्या में किसानों के परिजन वंचित हैं सन 2014 के बाद लगातार देश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार रही इसी दौरान रेलवे प्रबंधन ने यह आदेश जारी किया कि भूमि अधिग्रहण से पीड़ित किसानों के रिश्ते में जो नाती लगते हैं उनको नौकरी का प्रावधान नहीं है हमने यह मांग किया था कि यदि कानून में बाबा की संपत्ति पर नाती का प्रथम हक बताया गया है तो फिर नौकरी में नाती को क्यों बाहर रखा गया इसका जवाब न तो रेलवे प्रबंधन ने दिया न ही रेल मंत्रालय ने दिया न ही प्रधानमंत्री कार्यालय ने दिया इसके बाद इस आधार पर पीड़ित किसानों को प्रताड़ित किया जाने लगा कि 11 नवंबर 2019 के बाद रेलवे भूमि अधिग्रहण से पीड़ित किसान को नौकरी के प्रावधान से दूर रखा गया है इसी को लेकर लगातार गुमराह किया जाता रहा लेकिन रेलवे प्रबंधन जबलपुर ने अपने पत्र दिनांक 25 अगस्त 2020 में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि दिनांक 11 नवंबर 2019 के पूर्व तक प्राप्त आवेदनों पर ही कार्यवाही की जानी है इस आधार पर यह स्पष्ट हो गया है कि जिन पीड़ित किसानों के परिजनों ने 11 नवंबर 2019 के पूर्व नौकरी हेतु आवेदन किया था उन सभी को नौकरी पाने का हक अधिकार है इसके बाद भी रेलवे प्रबंधन किसानों को परेशान एवं प्रताड़ित कर रहा है श्री सिंह ने यह भी कहा कि 2014 से लगातार पूरे जोन के अंदर भारतीय जनता पार्टी के सांसद निर्वाचित हुए जो रेलवे कमेटी के अंदर मेंबर होते हैं और कोई भी नियम कानून में बदलाव होता है तो उनकी सहमति ली जाती है ऐसे में स्पष्ट हो चुका है कि जो भी किसान आज नौकरी एवं मुआवजे को लेकर धरने पर हैं इसकी जिम्मेदार देश एवं प्रदेश में बैठी सरकार एवं उसके सांसद हैं अभी कुछ दिन पहले सभी भाजपाई सांसदों ने चुनावी राजनीति के लिए सदन में औपचारिक रूप से बात रखी लेकिन उन्होंने गंभीरता पूर्वक पीड़ित किसानों का पक्ष नहीं रखा जिससे आज किसान आंदोलन को मजबूर हो रहा है संयोजक शिव सिंह ने आंदोलनकारियों को स्पष्ट रूप से कहा कि यह बड़ा मुद्दा है किसानों की पीड़ा से जुड़ा मामला है हम इस मुद्दे को एसकेएम की राष्ट्रीय कमेटी को भेजेंगे वादा करते हैं कि बड़े स्तर पर मोर्चा इस लड़ाई को लड़ेगा