वारिस और कड़कड़ाती ठंड में एक दर्जन परिवार के लोगों ने खुले में काटी रात
-खबर रीवा जिले से है जहां एक बार फिर प्रशासन का निर्दई चेहरा सामने आया -दरअसल तालाब की मेड पर अतिक्रमण किया गया था, जिसे प्रशासन ने हटा दिया, प्रशासन के द्वारा शासकीय भूमि खाली कराई गई यह जायज है, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि आखिर कई वर्षों से अतिक्रमण कर रह रहे लोग किस की छत्रछाया में पल रहे थे, आखिर उन्हें प्रधानमंत्री आवास किसके द्वारा स्वीकृत किया गया था, क्या गरीबों की गलती थी कि उन्हें आवास मिला और वह पक्के आवास बनाकर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे, अतिक्रमण हटाया जाना ही था तो 1 माह और टाल दिया जाता तो प्रशासन का क्या उजड़ जाता , कड़कड़ाती ठंड और बारिश के बीच एक दर्जन घरों को उजाड़ दिया गया, जिसके चलते पूरी रात कड़कड़ाती ठंड और बारिश के बीच परिवार के लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ खुले में रात बिताई ,पीड़ितों ने बताया कि उनका सामान नष्ट कर दिया गया उन्हें मौका तक नहीं दिया गया की अपनी ग्रहस्ती बचा ले, अब वह चाहते हैं कि उन्हें स्थाई पट्टा और पुनः आवास दिया जाए। दरअसल पूरा मामला सेमरिया विधानसभा क्षेत्र के शाव गांव का है ,जहां के लोगों ने तालाब पर अपना आशियाना बनाया लेकिन उन्हें उजाड़ दिया गया

