रीवा : शहर के 103 केंद्रों पर दसवीं की परीक्षा शुरू

रीवा : शहर के 103 केंद्रों पर दसवीं की परीक्षा शुरू:सातवीं में है बेटी और मां ने 28 की उम्र में दी दसवीं की परीक्षा

प्रदेश भर में दसवीं के 9 लाख 65 हजार छात्रों ने 3852 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा दी।
3099 सरकारी व 753 निजी स्कूलो के छात्र शामिल
शहर के 103 केंद्रों पर दसवीं की परीक्षा शुरू
सातवीं में है बेटी और मां ने 28 की उम्र में दी दसवीं की परीक्षा
छात्रों में दिखा उत्साह
परीक्षा केंद्रों में रही काफी भीड़ भाड़
परीक्षा पूर्व और बाद ने भीड़ के कारण रोड में लगता रहा जाम

हिंदी के पेपर के साथ बुधवार की सुबह माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड की दसवीं की परीक्षा शुरु हुई। परीक्षा के लिए 103 सेंटर्स बनाए गए ।

एक नजारा ऐसा भी
इस परीक्षा में शहर के मॉडल स्कूल पर एक 28 वर्षीय छात्रा अनिता अहिरवार ने अपनी दसवीं की परीक्षा दी। अनिता ने बताया कि साल 2009 में उनकी पढ़ाई शादी की वजह से छूट गई थी। फिर हमें बच्चों को भी पढ़ाना था तो आगे की पढ़ाई के लिए समय ही नहीं मिला। मेरे दो बच्चे हैं मेरी बेटी सातवीं क्लास में है वहीं मेरा बेटा पांचवीं में है। मैं खुद भी पढ़ती हूं और अपने बच्चों को भी पढ़ाती हूं। इसमें कोई शर्म की बात नहीं। मैं मानती हूं कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती।

नकल को रोकने सख्त नियम
इस बार नकल को रोकने के लिए अधिक सख्ती भी देखी गई। इसमें मुख्य रूप से परीक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए इस बार मंडल ने उत्तर पुस्तिका , पेपर सेट समेत कई नियमों में बदलाव भी किया।
वही पहली बार केंद्रों पर विद्यार्थियों की बैठक व्यवस्था भी बदली गई। इसके तहत अब एक ही स्कूल के छात्र-छात्राएं परीक्षा हाल में एक पंक्ति यानी एक-दूसरे के आगे-पीछे नहीं बैठ पाए। उनके बीच कुछ विद्यार्थियों का अंतर दिखाई दिया।
बता दें कि प्रदेश भर में दसवीं के 9 लाख 65 हजार छात्रों ने 3852 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा दी। इसमें से 3099 सरकारी व 753 निजी स्कूलों के बच्चे शामिल हैं।

मौके पर पहुंचे कई छात्रों को सप्लीमेंट्री कॉपी के बारे में जानकारी नहीं थी , कि उन्हें आज एक्सट्रा सप्लीमेंट्री कॉपी नहीं दी जाएगी। इसमें अधिकतर प्राइवेट छात्र शामिल थे। पुराने शहर की रहने वाली सुनिता ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि उनको सप्लीमेंट्री कॉपी नहीं मिलेगी। इसके अलावा अन्य कई बच्चे भी यहां ऐसे थे जिनको इस बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। इससे छात्रों को निश्चित् रूप से असुविधा हुई। यह संबंधित विद्यालयों और म.प्र. शिक्षा मंडल की चूक कही जाएगी।जिसमे नुकसान छात्रों का नुकसान और उन्हें ही असुविधा होती है । 

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