अपराधों को रोकने नहीं बल्कि वारदात के बाद अपराधियों के पकड़ने में सीसीटीवी कैमरे का हो रहा उपयोग 1 दर्जन से अधिक कर्मचारी दिन रात दे रहे ड्यूटी इसके बावजूद घटनाओं को रोकने में असफल।

अपराधों को रोकने नहीं बल्कि वारदात के बाद अपराधियों के पकड़ने में सीसीटीवी कैमरे का हो रहा उपयोग
1 दर्जन से अधिक कर्मचारी दिन रात दे रहे ड्यूटी इसके बावजूद घटनाओं को रोकने में असफल।
virat4, रीवा। पुलिस मुख्यालय द्वारा शहर में अपराधों को रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं।जिसमे करोड़ो रु खर्च किया गया है। जिसका कंट्रोल रूम पुलिस कंट्रोल रूम के तीसरे मंजिल पर संचालित किया गया है, जहां तीन पारियों में लगभग आधा दर्जन पुलिस कर्मचारी निगरानी रखने के लिए तैनात किए गए हैं। वही एक सब इंस्पेक्टर को प्रभारी के रूप में तैनात किया गया है। जबकि निजी कंपनी के कर्मचारी भी अपनी सेवाएं दे रहे है। कैमरा लगवाने  का  मुख्य उद्देश्य है कि शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से कंट्रोल रूम से सीधे पुलिसकर्मी नजर रखेंगे, और किसी भी  बिपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए तत्काल सूचना संबंधित थाना या बीट प्रभारियों को देंगे, लेकिन विगत 3 वर्ष से  कैमरो से महज वारदात के बाद आरोपियों की पहचान के लिए  उपयोग हो रहा है, शायद ही कोई ऐसा प्रकरण होगा जिसमें सीसीटीवी कंट्रोल रूम से पुलिस को यह सूचना मिली हो कि किसी भी स्थान में कोई संदिग्ध व्यक्ति या जाम की स्थिति निर्मित है, जिसे पुलिसकर्मी मौके पर जाकर ठीक कर सके।
दरवाजा बंद कर सोता मिलता है स्टाप
कंट्रोल रूम में संचालित सीसीटीवी कंट्रोल रूम का जायजा लेने जब हमारे जागरण की टीम पहुंची तो रविवार कि सुबह  2 महिला आरक्षक तैनात मिली, जहां दोनों पुलिसकर्मी सोफे में आराम  फरमा रही थी, जब उनसे जानकारी ली गई कि किस तरह से कैमरों में नजर रखी जाती है तो उन्होंने कहा कि जब कोई घटना घटित होती है और संबंधित थाना प्रभारी सूचना देकर किसी कर्मचारी को भेजता है तो उसे सीसीटीवी फुटेज दिखाया जाता है। । और हड़बड़ाहट में दोनों कर्मचारी कंट्रोल रूम के अंदर लगे स्क्रीन के ऊपर नजर गड़ा कर देखने लगी। जिससे स्पष्ट हो जाता है कि कंट्रोल रूम में सिर्फ एक दर्जन कर्मचारी समय काटने के लिए तैनात किए गए अगर वारदात होने के बाद ही फुटेज देखना है तो कंट्रोल रूम में ताला लगा कर भी छोड़ा जा सकता है और वारदात होने के बाद फुटेज खंगाले जा सकते हैं। और इन 1 दर्जन कर्मचारियों को थानों में तैनात किया जा सकता है।

40 लोकेशन में लगाए गए हैं 222 कैमरे
मिली जानकारी के अनुसार शहर से बाहर निकालने वाले मार्गो और शहर के अंदर लगभग 44 ऐसे लोकेशन चिन्हित  किए गए हैं जहां 222 कैमरों से नजर रखी जा रही है, लेकिन कंट्रोल रूम के अंदर महज दो स्क्रीन में 10 कमरे ही चलते दिखाई दे रहे है। जिनसे से पता चलता है कि ज्यादातर कैमरे सिर्फ दिखावे के लिए लगे और यही कारण है कि वारदात होने के बाद अपराधी आराम से निकल जाते हैं और पुलिस फुटेज में खंगालने  की बात कहकर पल्ला झाड़ लेती है। सीसीटीवी कंट्रोल रूम प्रभारी उप निरीक्षक मोहित पांडेय से जब पूछा गया कि जब से सीसीटीवी कैमरे लगे हैं तब से कोई भी एक घटना आप बताइए जिसमें वारदात से पहले ही आपको को सूचना मिली हो और  संबंधित थाना  प्रभारी को सूचना देकर रुकवाने का प्रयास किया हो प्रभारी ने  एक भी घटना का जिक्र  नहीं कर पाए।

वर्जन
कंट्रोल रूम में तीन पारियों में दो दो पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है ,मेरे साथ 6 कर्मचारी तैनात है।ज्यादातर धरना प्रदर्शन और विवाद की स्थिति में उक्त लोकेशन में लगे कैमरों से नजर रखी जाती है ,मुझे याद नहीं है कि कोई ऐसी वारदात हुई हो जिसे पहले से कैमरों के माध्यम से देखकर रोका गया हो लेकिन कई ऐसी घटनाएं हैं जिनमें कैमरों के माध्यम से जानकारी मिलने पर थाना प्रभारी को सूचना दी गई है।
मोहित पांडेय प्रभारी सीसीटीवी

वर्जन
 40 लोकेशन पर 222 कैमरे लगे हैं जबकि कंट्रोल रूम से एक बार में सिर्फ 10 कैमरो पर ही नजर रखी जा सकती है, यह सही है कि अगर इसका उपयोग और बढ़ा दिया जाए और स्क्रीन  बढ़ाई जाए तो फायदा मिलेगा। जब विवाद की स्थिति होती है तब कंट्रोल रूम को अलर्ट किया जाता है और नजर रखते हैं,  अभी संवेदनशील इलाके में लगे कैमरों पर 24 घंटे नजर रखी जाती  हैं, आने वाले समय में स्क्रीन और स्टाफ बढ़ाया जाएगा तो निश्चित रूप से इसका फायदा अपराध को रोकने में मिलेगा जिसके लिए प्रयास किया जा रहा है।
शिव कुमार वर्मा एडिशनल एसपी

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