रीवा मंडी में परेशान किसान

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विराट24 न्यूज़-मंडी में परेसान किसान–रीवा-03-12-18

सरकार चाहे जितना घोषणा करे की किसानों की सरकार है और किसानों के हित के लिए कदम उठा रहे हैं लेकिन किसानों की हालत जस का तस बनी हुई है आज भी किसान फसल उगाने के बाद कहीं बेचने के लिए परेशान है तो कहीं बेचने के बाद पैसे के लिए ताजा मामला रीवा करहिया मंडी का है जहां खरीदी के लिए किसानों को मैसेज पहुंचने के बाद खरीदी नहीं हो रही है ।मूंग और उड़द की खरीदी हो भी रही है तो अच्छी उपज को खराब कहकर रिजेक्ट किया जा रहा है वहीं पूरे मामले को लेकर खाद विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए है।

– प्रशासन खरीदी का लक्ष्य पूरा करने के लिए नवंबर माह से ही खरीफ की फसल खरीदी का समय निर्धारित किया है और किसानों के पास 15 नवंबर से अपनी फसल बेचने का मैसेज पहुंच रहा है लेकिन जब किसान अपनी फसल लेकर मंडी में बेचने के लिए पहुंच रहे हैं तो वहां कोई खरीददार नहीं है अधिकारी यह कह कर अपना पल्ला झाड़ रहे है कि वोट काउंटिंग के बाद धान की खरीदी की जाएगी
किसान परेशान है इन दिनों रवि की फसल बोने का समय चल रहा है जिसके लिए किसान को खाद बीज की आवश्यकता है जिसे पूरा करने के लिए वह धान की फसल को बेचकर खाद वीज खरीदना है लेकिन मंडी में खरीदी ना होने के चलते एक तरफ जहां खरीफ की फसल का नुकसान हो रहा है वही रवि की फसल न बोए जाने से भी किसान चिंतित है।

कुछ ऐसे किसान भी मिले जो रजिस्ट्रेशन अपने नाम से करवाया है लेकिन विभाग के द्वारा गलत नामों से रजिस्ट्रेशन किया गया है अब किसान की समस्या यह है कि अगर गलत रजिस्ट्रेशन के आधार पर अपनी फसल वेचता है तो उसका भुगतान किस के खाते में होगा और फसल बेचने के बाद भी अगर भुगतान उसे नहीं मिला तो किसान की एक और सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी पीड़ित अवध शुक्ला ने बताया कि वह अपने नाम से रजिस्ट्रेशन कराया था लेकिन विभाग की लापरवाही के चलते अजीत शुक्ला के नाम से रजिस्ट्रेशन हो गया है और वह अब परेशान है कोई सुनने वाला नहीं है कई दिनों से चक्कर लगा रहे हैं। मूंग और उड़द की फसल बेचने आए किसान रामसुमिरन सिंह ने बताया कि वह चार टाली उपज लेकर आया है जिसमें से एक ट्राली अनाज की खरीदी की गई है बाकी वह ट्रैक्टर में लेकर खड़ा हुआ है कई दिनों से चक्कर लगा रहा है लेकिन उसकी उपज खरीदी नहीं हो रही है वही अच्छी उपज को भी क्वालिटी कंट्रोलर द्वारा खराब बताकर रिजेक्ट किया जा रहा है अब वह परेशान है कोई भी अधिकारी उसकी सुनने के लिए तैयार नहीं है।
जब हमने क्वालिटी कंट्रोलर अजय चतुर्वेदी से बात की तो उसने भी माना कि उपज की क्वालिटी की जांच मशीन से नहीं करता है क्योंकि अगर मशीन से जांच करेगा तो एक-दो ही किसान अपनी उपज बेच पाएंगे।जब उससे पूछा गया कि मशीन के द्वारा अगर किसी की जांच किया हो तो एक किसान का नाम बताएं तो वह बोला साधारण तौर पर देख कर ही फसल अच्छी है या खराब तय कर देता है जब उससे पूछा गया कि मशीन के द्वारा अगर किसी की जांच किया हो तो एक किसान का नाम बताएं तो वह चुप हो गया और इधर उधर झांकने लगा।
मामले को लेकर समिति अध्यक्ष से बात की गई तो उसने कहा कि मशीन सही जांच की जा रही है जो मानक तय किए गए हैं उन्हीं के आधार पर किसानों की खरीदी की जा रही है वहीं धान की खरीदी को लेकर उसने भी अपना पल्ला झाड़ लिया और कहा कि नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारी जाने की धान की खरीदी कब की जाएगी जब हमने नागरिक आपूर्ति विभाग पहुंचकर सहायक नागरिक आपूर्ति अधिकारी अंबुज श्रीवास्तव से बात की तो उन्होंने कहा कि मुख्य नागरिक आपूर्ति अधिकारी आकर ही बता पाएंगे कि किसानों की उपज की खरीदी क्यों नहीं हो रही है।
जिस तरह से अधिकारियों ने बहाने बनाकर अपनी जवाबदारी से मुंह मोड़ा और जो देखने में आया उससे स्पष्ट होता है कि किसान खाद बीज खरीदने से लेकर अपनी उपज को मंडी में बेचने तक परेशान हो रहा है और सरकार के द्वारा किए गए वादे सभी झूठ साबित हो रहे हैं।

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