दुविधा में रिमही वोटर

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विराट24 न्यूज़ रीवा

दुबिधा मा रिमही जनता

इस समय प्रदेश के साथ रीवा जिले में चुनावी बयार बह रही है रीवा जिले की 8 विधानसभा सीटों में से प्रमुख सीट रीवा विधानसभा है जहां से लगातार तीन पंचवर्षीय चुनाव जीतकर भारतीय जनता पार्टी से प्रत्याशी और मंत्री रहे राजेंद्र शुक्ला चुनाव मैदान में है वही जनपद, जिलापंचायत और विधायक का चुनाव जीतकर जीत से उत्साहित कांग्रेस प्रत्याशी अभय मिश्रा इस सीट में अपना दमखम लगा रहे है। पूरे जिले के साथ प्रदेश स्तर तक की राजनीति के जानकार और राजनीति में रुचि लेने वाले लोगों की नजर इस सीट पर बनी हुई है, लेकिन रिमही जनता पशोपेश में है एक तरफ लोगों के द्वारा कहा जा रहा है कि वक्त है बदलाव का जिसे सुनकर जनता आश्चर्यचकित यह है और सोचने को मजबूर है कि अगर वक्त बदलाव का आया तो कहीं 2003 के पहले वाली स्थिति ना वापस आ जाए। जब वह सुनती है कि राजेंद्र भैया फिर एक बार उसे लगता है कि शहर की कीमती जमीन जो बची हुई है उस मे भी न समदड़िया मॉल बन जाए ।वहीं रीवा का वोटर इस दुविधा में है कि अगर रीवा से कांग्रेस प्रत्याशी को विजई बनाया और प्रदेश में सरकार भाजपा की बनी तो रीवा उपेक्षित हो जाएगा और अगर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी राजेंद्र शुक्ला को जिताया और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो फिर रीवा विकास में पिछड़ जाएगा । बोटर के पास रीवा में तीसरी विकल्प के रूप में कोई ऐसी पार्टी नहीं है जिसकी सरकार प्रदेश में बनने वाली हो या पार्टी तीसरी शक्ति के रूप में अपनी उपस्थित दर्ज करा दे। हालांकि दोनों प्रत्याशियों के साथ बहुजन समाज पार्टी समाजवादी और सपाक्स भी जोर आजमाइश कर रहे हैं जिनकी भूमिका मुख्य पार्टी भाजपा और कांग्रेस का समीकरण बिगाड़ने के अलावा और कहीं नहीं दिख रही है। रीवा की जनता विकल्प की तलाश में है लेकिन विकल्प किसे चुनती है यह 28 तारीख को मत पेटी में बंद हो जाएगा और 11 दिसंबर को रीवा के विधायक का फैसला होगा अभी जनता जो भी प्रत्याशी उसके दरवाजे पर जाता है उसी को अपना विधायक मानकर वोट देने के लिए हां में हाँ मिलाती है जिसके चलते सभी प्रत्याशी इस उत्साह में डूबे हुए हैं कि बस रिमही जनता इस बार हमें ही अवसर देना चाहती है लेकिन वोटर अभी भी दुविधा में है।

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