शासकीय जमीन में निजी व्यक्ति को कैंटीन नियम कानूनों को किया गया दरकिनार

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विराट24न्यूज़

पुलिस कैंटीन के लिए नियमों को किया गया दरकिनार
अपने चहेते को उपकृत करने के लिए बिना टेंडर और बिना सर्च दी गई कैंटीन
ओम जी और जमीन लगाने के बाद भी पुलिस विभाग को नही मिलेगा कुछ।
महिला थाना के सामने लोकार्पित कैंटीन का मामला।

विराट24न्यूज़-रीवा। शासकीय राशि और जमीन का दुरुपयोग लगातार वरिष्ठ अधिकारी और नेता अपने चहेतों को देने के लिए करते रहे हैं। ऐसे कई मामले उजागर भी हुए हैं। अगर दूसरों की संपत्ति की सुरक्षा करने वाले अपनी ही संपत्ति लुटाए तो लोग सोचने को मजबूर हो जाते हैं। मामला महिला थाना के सामने संचालित पुलिस कैंटीन का है। जिसका लोकार्पण रीवा जोन के आईजी, डीआईजी, पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति में किया गया ।इस कैंटीन को देने के लिए सभी नियम कायदों को दरकिनार कर दिया गया है। नाम के लिए पुलिस वेलफेयर है लेकिन किसी प्रकार की मदद ना तो पुलिस विभाग को मिलेगी और ना ही इनके कर्मचारियों को ।अगर किसी को फायदा होगा तो कैंटीन संचालक को और जिन अधिकारियों की कृपा से निजी व्यक्ति कैंटीन संचालन किया है ।कैंटीन में नाम भी पुलिस कैंटीन रखा गया है। जबकि सीधे-सीधे पुलिस विभाग के अधिकारी अपनी जमीन पर अपनी पूंजी लगाकर प्राइवेट होटल का संचालन करवाया है। बतादे की यही कैंटीन अगर किसी रिटायरमेंट पुलिसकर्मी या पुलिसकर्मियों के परिवारों को दी जाती तो निश्चित तौर पर विभाग को राजस्व भी मिलता और शासकीय जमीन का उपयोग भी बिभाग के लिए होता।

शासकीय कार्य देने का नियम है

किसी प्रकार की शासकीय संपत्ति क्रय- विक्रय लीज में देने का नियम है कि खुला टेंडर हो, इसके लिए इस्तिहार दिया जाय, और अपनी शर्ते रखी जाए जो व्यक्ति विभाग की शर्तों का पालन करें ,अच्छी क्वालिटी कम पैसे में देने की शर्त माने उसे लीज, बिक्री या टेंडर दिया जाता है। लेकिन पुलिस विभाग के द्वारा खुलवाई गई कैंटीन में इस तरह के किसी नियम का पालन नहीं किया गया है।
कैंटीन देने में क्या हुआ

पुलिस बिभाग की जमीन में कैंटीन खुलवाने के लिए किसी भी प्रकार के शासकीय नियमों का पालन नहीं किया गया ।अपने खास या यह कहें कि शासन की मदद ना कर जुड़े हुए अधिकारियों की मदद कर संचालक ने कैंटीन हथिया ली। कैंटीन को संचालन और निर्माण के लिए पुलिस वेलफेयर से तीन लाख का फंड दिया गया। ना तो ओपन टेंडर बुलाया गया और ना ही विभाग के किसी रिटायर्ड या वर्तमान कर्मचारी को दिया गया और ना ही किसी को जानकारी हुई ।रातो रात कैंटीन संचालक ज्ञान सिंह को भूमि आवंटित कर दी गई और एक सप्ताह के अंदर कैंटीन शुरू। संचालक को कैंटीन चलाने का अनुभव है या नहीं यह तक नहीं देखा गया है। और ना ही किन शर्तों पर दिया गया है इसका कहीं उल्लेख किया गया है।
बता दे कि पूंजी लगाने और करोड़ों की जमीन आवंटित करने के बाद भी पुलिस कर्मचारियों को खाने और नाश्ते में तीस प्रतिशत की छूट।इतना ही नही खाने पीने की वस्तुओं के रेट का निर्धारण भी स्वयं कैंटीन संचालक करेगा ।अगर यही जमीन और पूंजी लगाने से पहले टेंडर डलवा कर किसी को आवंटित की जाती तो लाखों रुपए का राजस्व किराए के रूप में और बेहतर सेवा विभाग को मिल सकती थी।

कैंटीन संचालक करेगा पुलिस विभाग के नाम का दुरपयोग।

शहर के प्राइम लोकेशन में खुलवाए गई कैंटीन का संचालक पुलिस कैंटीन के नाम पर मनमर्जी भी करेगा।ऐसा इसलिये माना जा रहा है कि कैंटीन के बाहर बोर्ड में पुलिस के लिए निर्धारित रंगो और मोनो का उपयोग किया जा रहा है ।इतना ही नही पुलिस कैंटीन लिखा हुआ है ।जिसके चलते यहां पहुंचने वाले किसी प्रकार की अनियमितता और संचालक की मनमानी का विरोध भी नहीं कर पाएंगे और संचालक जहां मनमानी रेट वसूल करेगा ,इसकी मनमानी की शिकायत भी करने की हिम्मत आम नागरिक नहीं उठा पाएंगे। शायद संचालक और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने इसीलिए सभी नियम कायदों को ताक पर रखकर एक व्यक्ति को गुपचुप तरीके से कैंटीन के लिए जमीन आवंटित कर दिया है।
वर्जन
कैंटीन संचालक मेरे संपर्क में था, वह मुझसे मिलकर बात किया तो उसे कैंटीन संचालन के लिए जमीन लीज पर दे दी गई है, संचालक तीस प्रतिशत पुलिस विभाग के कर्मचारियों को भोजन और नाश्ते में छूट देगा, विभाग और संचालक के बीच में शर्ते हैं जो गोपनीय है बताई नहीं जा सकती, अभी किराया और समय का निर्धारण नहीं हुआ है। मैं शहर से बाहर था अभी आया हूं ,मेरे विभाग के पास इतने आदमी नहीं थे जो कैंटीन का संचालन कर सकते इसलिए जो संपर्क में आया उसी को दे दिया गया है।

केशव सिंह चौहान (आरआई)

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